
साधना उपाध्याय को छठवीं बार राष्ट्रपति के समक्ष गणगौर नृत्य की प्रस्तुति का अवसर।
राष्ट्रपति भवन में चतुरंग कार्यक्रम के तहत निमाड़ के लोकनृत्य की दी प्रस्तुति, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कलाकारों को दिया स्नेह भोज।
खंडवा। निमाड़ की लोक संस्कृति और परंपरा को देश के सर्वोच्च संवैधानिक मंच तक पहुंचाने वाली लोक कलाकार साधना उपाध्याय ने एक बार फिर गौरव बढ़ाया। 17 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित चतुरंग कार्यक्रम के तहत साधना उपाध्याय ने हेमंत उपाध्याय एवं नातिन गौरी काजवे के साथ निमाड़ का पारंपरिक गणगौर नृत्य प्रस्तुत किया। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि यह छठवीं बार है, जब साधना उपाध्याय एवं उनकी टीम को महामहिम राष्ट्रपति के समक्ष गणगौर नृत्य प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
कई राष्ट्रपतियों के समक्ष दे चुकी हैं प्रस्तुति
साधना उपाध्याय इससे पहले विभिन्न अवसरों पर तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और रामनाथ कोविंद के समक्ष भी गणगौर नृत्य की प्रस्तुति दे चुकी हैं। इसके अलावा केन्या के राष्ट्रपति के समक्ष भी उन्होंने निमाड़ी लोकनृत्य प्रस्तुत कर भारतीय लोक संस्कृति की झलक दिखाई है।
राष्ट्रपति भवन में कलाकारों का सम्मान
समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि राष्ट्रपति भवन में प्रस्तुति के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से कलाकारों के लिए स्नेह भोज का आयोजन किया गया। इस अवसर ने कलाकारों के लिए गौरव और सम्मान का क्षण दिया। साधना उपाध्याय की लगातार छठवीं राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुति को निमाड़ की लोक कला और संस्कृति के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
साधना उपाध्याय की प्रस्तुतियों के माध्यम से निमाड़ की पारंपरिक गणगौर संस्कृति देश के महत्वपूर्ण मंचों तक पहुंच रही है। राष्ट्रपति भवन में एक बार फिर निमाड़ी लोकनृत्य की प्रस्तुति ने क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया।












